उज्जैन में नशे की वस्तुएं और परम्परा
राजेन्द्र कानूनगो अधिमान्य पत्रकार
भोपाल । मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में नशीले पदार्थ जिनमें भांग, गांजा, शराब आदि सम्मिलित है, इनके सेवन की एक बड़ी परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा में भगवान से लेकर इंसान तक अछूते नहीं है। देवाधिदेव, कालों के काल भगवान महाकाल पर भांग का श्रंगार सदियों से होता आ रहा है और श्रृंगार की हुई भांग श्रद्धालुओं को उनके निवेदन पर प्रसाद स्वरूप दी भी जाती है । यह एक परंपरा है इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। आगे यदि हम देखें तो प्रसिद्ध प्रतिमा भगवान काल भैरव की जो उज्जैन में स्थित है, उनको मदिरा का भोग लगता है । जैसा कि सभी जानते हैं वह मदिरा कहां जाती है यह आज तक किसी को पता नहीं चला है। अतः यह कहा जा सकता है कि काल भैरव मदिरा का सेवन करते हैं। वहीं पर यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि निवेदन करने पर प्रसाद स्वरूप उक्त मदिरा भक्तों को प्रधान भी की जाती है।
एक और परंपरा है उज्जैन में, जिसमें वहां स्थित 24 खंबे से लेकर गढ़ कालिका तक मदिरा की धार उज्जैन के प्रशासन के प्रमुख कलेक्टर द्वारा एक निश्चित अवसर पर चढ़ाई जाती है। वह धार लेकर कलेक्टर चलते हैं तथा रास्ते में जितने भी धार्मिक स्थल आते हैं वह सब उसमें समावेशित होते हैं। अतः यह परंपरा भी अनूठी है, जो और कहीं पर देखने को नहीं मिलती है। अब इसी कड़ी में एक और बात आती है। उज्जैन में साधु संत निवास करते हैं। कई अखाड़े बने हैं। इन अखाड़ों में जो साधु और संत रहते हैं वह गांजे की चिलम का उपयोग करते हैं और अपनी साधना में लीन रहते हैं।


अतः उज्जैन में उन पदार्थों को, जिनसे नशा किया जाता है वह एक प्रचलित परंपरा के अनुसार कहीं पर भी अवरोध के रूप में नहीं देखा जाता है। उज्जैन के अलावा प्रदेश का और कोई नगर ऐसा देखने में नहीं आया है जहां पर कि इस प्रकार की परंपरा सदियों से चली आ रही हो। यह कहने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए की आगे भी उज्जैन में यह परंपराएं जारी रहेगी। हाल ही में मध्य प्रदेश की सरकार ने धार्मिक नगरों में जिनमें कई नगर सम्मिलित हैं, उनमें शराबबंदी या कहें शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाई है। वैसे तो देखा जाए तो मध्य प्रदेश की जीवनदायनी और मोक्ष प्रदायिनी सभी की पूजनीय मां नर्मदा जिस - जिस स्थल से बहती है वह सारे स्थल पवित्र स्थल माने जाते हैं, जिनमें नर्मदापुरम भी सम्मिलित है। कहना गलत नहीं होगा कि शराब मनुष्य को भीतर से खोखला कर देती है और अनेक प्रकार की बीमारियों का एक सबसे बड़ा कारण होती है, जिसमें सामाजिक बुराइयां भी सम्मिलित हैं, शराब होती है। शराब पर यदि पाबंदी लगाई जाती है तो यह एक अच्छा कदम है और यह पाबंदी यदि पूरे प्रदेश में लगाई जाए तो कहना अनुचित नहीं होगा कि यह सोने में सुहागे की तरह होगा। जो भी हो सरकार ने जो कदम उठाया है वह सराहनीय है, प्रशंसनीय है और इससे धर्म प्रेमी बंधुओं को बहुत ही प्रसन्नता हुई है।


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