ट्रंप की नीतियों से नाराज सहयोगी, तालिबान विरोधियों को नहीं मिला समर्थन
तिराना/काबुल। तालिबान और आईएस के लड़ाकों के खिलाफ अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अफगानी नागरिकों का जीवन अधर में लटक गया है। ऐसा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिए गए नए निर्णयों के कारण हुआ है।
इन लोगों में वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की मदद के लिए चालक और अनुवादक के रूप में काम किया। इन लोगों को अमेरिका में बसाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
अफगान असमंजस में
ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेशों से अब अफगानों को अमेरिका में सुरक्षा प्रदान करने वाले कार्यक्रम समाप्त हो गए हैं। इससे अमेरिका की मदद करने वाले अफगान असमंजस में हैं। अमेरिका के नए राष्ट्रपति की कार्रवाई से प्रभावित लोगों में शामिल रौशनगर ने कहा कि एसोसिएटेड प्रेस केवल उनके पहले नाम का उपयोग करे, क्योंकि उन्हें तालिबान का डर है। इस तरह के बहुत से अफगान लोग हैं, जिन्हें मदद के बदले अमेरिका ने बेहतर जिंदगी देने का वादा किया था, लेकिन ट्रंप के कदमों के कारण अब उनकी स्थिति अंधकारमय नजर आ रही है।
अफगानिस्तान में विगत वर्ष 34 हजार भिखारी गिरफ्तार
अफगानिस्तान में पुलिस ने भीख मांगने की संस्कृति को खत्म करने के लिए पिछले साल देशभर से 34 हजार से अधिक भिखारियों को गिरफ्तार किया है। आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हमने पिछले साल 34,377 भिखारियों को गिरफ्तार किया है। वहीं अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने पिछले सप्ताह पूर्वी नंगरहार प्रांत में 731 किलोग्राम ड्रग्स को जब्त किया है। इसके साथ ही 25 तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है।


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